Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
ब्रह्म सर्वमिदं विश्वं विश्वातीतं च तत्पदम् ।
वस्तुतस्तु जगन्नास्ति सर्वं ब्रह्मैव केवलम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
सामने दीख रहा यह सब विश्व ब्रह्म ही है, वह ब्रह्मपद विश्व से परे है । वस्तुतः यह
जगत है ही नहीं, सब कुछ केवल ब्रह्म ही हे