Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
असत्यैव विकल्पोक्तिः सत्यभावो विकल्पते ।
तमोपहतदृष्टित्वाद्द्विचन्द्रज्ञानदोषवत् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
से दूसरी अग्नि की शिखा उत्पन्न हुई वैसे ही ब्रह्म से मन की संज्ञारूप शिखा उत्पन्न हुई है । चंचलता
से उत्पन्न विकल्प संपत्ति नित्यसिद्ध कूटस्थ ब्रह्म में सिद्ध नहीं होती है ॥ ३ २॥ तमस दृष्टि के क्षीण होने
के कारण जैसे द्विचन्द्र ज्ञानदोष मिथ्या है, वैसे ही सत्य वस्तु विकल्प से युक्त हे, यह विकल्प कथन
मिथ्या ही है