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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

यत्तदप्यमृतं ब्रह्म सर्वव्यापि निरामयम् । चिदाभासमनन्ताख्यमनादि विगतभ्रमम् ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

जो अमृत, सर्वव्यापक, निरामय, भ्रमस्पर्शशून्य, अकारण और अनन्त नामवाला ब्रह्म है, वह जिस तरह चिदाभासता को प्राप्त हुआ, उसे भी उसी सर्ग में कहूँगा