Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
निस्पन्दवपुषस्तस्य स्पन्दः सत्तैकदेशतः ।
घनतामेति सौम्येऽब्धौ चलता चलतामिव ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
निश्चल समुद्र में चंचल तरंगों की
चंचलता की भाँति स्पन्दनशून्य शरीरवाले उस परमात्मा का जो जीवभाव से स्पन्द है, वह जिस तरह
घनता को प्राप्त होता है, उसे भी उसी सर्ग में कहूँगा