Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

बह्वाधयो दुःरवमया मोहद्वेषभयातुराः । तासां सम्यक्प्रवक्ष्यामि तावद्राजससात्त्विकीः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

उनके वैराग्य होने में हेतु बतलाते हैं। उन नरजातियों के मध्य में कुछ मनोव्यथा से पीडित, दुःखमय तथा मोह, द्वेष ओर भय से आतुर हैं, अतः तमोगुण प्रधान होने के कारण उनका शास्त्र में अधिकार नहीं है उपदेश योग्य रजोगुण ओर सत्त्वगुणप्रधान जो जातियाँ है, उन्हें मैं बयालीसवें सर्ग में कहूँगा, यह अर्थ है