Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
निर्दुःखं ब्रह्म निर्द्वन्द्वं तज्जं दुःखमयं जगत् ।
अस्पष्टार्थमिदं ब्रह्मन्न वेद्मि वचनं तव ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्नद्ृष्टि में ही स्थित श्रीरामचन्द्रजी सर्वथा एकमात्र आनन्दस्वरूप ब्रह्म की आनन्द विरुद्ध
जगद्रूपता नहीं कही जा सकती है, यों जिद करते हैं।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे ब्रह्मन्, ब्रह्म दुःखरहित तथा द्रन्द्ररहित है ओर उससे उत्पन्न हुआ
जगत दुःखमय है, आपका यह अस्पष्टार्थ वचन मेरी समझ में नहीं आ रहा है