Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
भगवन्नेवं स्थिते परे ब्रह्मण्येव विद्यमाने कुत
एवाभित्तिचित्ररूपायाः सृष्टेरागम इति कथय महात्मन् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञद्रष्डि मे ही स्थित श्रीरामचन्द्रजी गुरुवचनों में विश्वास होनेके कारण परोक्षरूप से ही पूर्णता
स्थिति का आलोचन करके परस्पर विरोध का अनुभव करते हुए शंका करते है ।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, आपके कथनानुसार बन्ध-मोक्ष आदि का असंभव रहने पर और
एकमात्र परब्रह्म के ही विद्यमान रहने पर आधार के बिना ही चित्ररूप इस सृष्टि का आगमन कहाँ से
हुआ ? हे महात्मन्, उसे आप कृपापूर्वक मुझसे कहिये
सर्ग सन्दर्भ
अडतीसवाँ सर्ग समाप्त उनतालीसवाँ सर्ग ब्रह्म की सर्वशक्तिता, श्रीरामचन्द्रजी के मोह का विस्तार, उनके बोध के लिए श्री वसिष्ठजी के विचार आदि का वर्णन ।