Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
संकल्पिता जगति मोक्षमतिर्मुधैव संकल्पिता जगति बन्धमतिर्मुधैव ।
संत्यज्य सर्वमनहंकृतिरात्मनिष्ठो धीरो धिया व्यवहरन्भुवि राम तिष्ठ ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त पूणत्मिनिष्ठा का उपसंहार कर रहे श्रीवसिष्ठजी श्रीरामचन्द्रजी के लिए उपदेश देते है ।
जगत में संकल्पित मोक्षबुद्धि असत्य ही है, जगत में संकल्पित बन्धबुद्धि भी असत्य ही है, इसलिए
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप बन्ध-मोक्ष आदि सबका त्यागकर अहंकारशून्य, आत्मनिष्ठ अतएव धीर बुद्धि
से व्यवहार करते हुए भूलोक में स्थित होइये