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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । राजपुत्र ब्रह्मतत्त्वमेवेदमावर्तते यस्मात्सर्वशक्ति तत्तस्मात्सर्वाः शक्तयो ब्रह्मणि दृश्यन्ते ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

क्या ये अज्ञद्गष्टि में रहकर शंका करते है, अथवा थोड़ी बहुत अभिज्ञता को प्राप्त होकर अज्ञता- अभिज्ञता के मध्यवर्ती होकर शंका करते हैं, ऐसी परीक्षा करने के लिए श्रीवस्तिष्ठजी सर्वशक्तितावाद के स्वीकार द्वारा श्रीरामचन्द्रजी की शंका को दूर करते है । श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे राजकुमार, ब्रह्मतत्त्व का ही यह विवर्त है, वह ब्रह्म सर्वशक्ति हे, कार्य से ही ब्रह्म में सर्वशक्तिता का अनुमान होता है