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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

न बन्धोऽस्ति न मोक्षोऽस्ति नाबन्धोस्ति न बन्धनम् । अप्रबोधादिदं दुःखं प्रबोधात्प्रविलीयते ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

अब पद्य द्वारा फलितार्थ कहते है । न बन्धन है, न मोक्ष हे, न बन्धन का अभाव है ओर न बन्धन के कारण काम-कर्म आदि हे । तत्त्व के अज्ञान से ही यह दुःख है, ज्ञान से लीन हो जाता हे