Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
तेजःपुञ्जैर्यथा तेजः पयःपूरैर्यथा पयः ।
परिस्फुरति संस्पन्दैस्तथा चित्सर्गविभ्रमैः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
चिति का विवर्त भी परमार्थद्रष्टि से चिद्रूप ही है, इस आशय से दो दृष्टान्त कहते है ।
जैसे तेज के पुजों से तेज ही स्फुरित होता है और जैसे जल के प्रवाहो से जल ही स्फुरित होता है
वैसे ही अपने स्पन्दरूप सर्गभ्रान्तियों से चित्तत्त्व ही स्फुरित होता है