Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
सैषा चिदमलाकारा स्वयमात्मनि संस्थिता ।
राघवेत्थं प्रपञ्चेन जगन्नाम्ना विजृम्भते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
यह निर्मल चिति स्वयं अपने स्वरूप में स्थित हे । हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार
जगतनामक प्रपंच से विवर्त रूप में स्थित हे