Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
शुभाशुभानसद्ग्लानीन्प्रसूते सुगुणान्सदा ।
फलदानङ्कुरान्काले श्रेष्ठबीजवतीव भूः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
शुभ मति जिनसे दुःख नहीं होता एसे शम, दम आदि
सद्गुणो से युक्त ज्ञान, समाधि और विश्रान्तिरूप मोक्ष फल देनेवाले अंकुरों को समय पर ऐसे उत्पन्न
करती है, जैसे धरती धान आदि फलों को देनेवाले अंकुरों को समय पर उत्पन्न करती है