Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
यादृग्वासनमेतत्स्यात्तमनस्तादृक्प्रजायते ।
जातं स्वपिति यच्चित्तं तत्स्वप्ने निशि तिष्ठति ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीर वासनामय है, इसमें युक्ति कहते हैं।
यह मन जैसी भावनावाला होगा, वैसा ही शरीर उत्पन्न होगा। चित्त जैसा होकर सोता है, रात के
समय स्वप्न में वही बनकर रहता है