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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

अम्लं मधुरसासिक्तं मधुरं मधुरञ्जितम् । बीजं प्रतिविषाकल्कसिक्तं च कटु जायते ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

विषयों के वासना स्थापन में दृष्टान्त कहते हैं। इमली का बीज शहद के रस से यदि सींचा जाय, तो अंकुर आदि के क्रम से वृक्ष बनकर फलने के समय भी शहद से अनुरंजित होकर मधुर होता है, वही बीज विष के प्रतिनिधिभूत धत्तूर, कच आदि के रस से सींचा जाय, तो फलने के समय में भी कडवा पैदा होता है, ऐसा लोक में प्रसिद्ध है