Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
इमं देहभ्रमं त्यक्त्वा देशकालान्तरे पुनः ।
शरीरत्वमथादत्ते पल्लवत्वमिवाङ्कुरः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जीव की देहात्मकता के अभाव में युक्ति कहते हैं।
जीव इस वर्तमान देह भ्रम का त्याग करके पुन: दूसरे देश और दूसरे काल में अन्य देह भाव को
धारण करता है, जैसे कि अंकुर पल्लवता को धारण करता है