Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
अहंकारानुसंधानवर्जनादेव राघव ।
पौरुषेण प्रयत्नाच्च तीर्यते भवसागरः ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, अहंकार के स्मरण के त्याग
से, धैर्य से ओर श्रवण आदि प्रयत्न से संसाररूपी सागर पार किया जाता है