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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 69

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 69 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 69

संस्कृत श्लोक

भोगेष्वस्वदमानेषु पुंसः श्रेयः पुरो गतम् । क्षीणेऽन्धकारे किं नाम मनसोऽन्यत्प्रवर्तते ॥ ६९ ॥

हिन्दी अर्थ

भोगों के स्वाद न देने पर परम कल्याण पुरूष के सामने स्थित-सा हो जाता है, क्योकि उसके प्रतिबन्धक की निवृत्ति हो जाती है। अन्धकार के तुल्य अग्रहण और अन्यथा ग्रहण में निमित्तभूत मन के अहंकार के नष्ट होने पर ओर क्या प्रतिबन्धक शेष रह जाता है, जिससे परमपद की प्राप्ति मेँ विघ्न हो ?