Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 68
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
संशान्ताहंकृतेर्जन्तोर्भोगा रोगा महामते ।
न स्वदन्ते सुतृप्तस्य यथा प्रतिविषा रसाः ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामति श्रीरामचन्द्रजी,
जिस पुरुष का अहंकार नष्ट हो गया, उसको भोगरूपी रोग इस प्रकार स्वाद नहीं देते, जैसे खूब तृप्त
पुरुष को विषमिश्रित षड्रस स्वाद नहीं देते