Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
करटापातविस्फोटा भान्त्यर्था वासनादयः ।
विचार्यचारुरववत्तरङ्गवरपङ्किवत् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
वासना आदि पदार्थ बड़े ध्यान से
सुनने योग्य शब्दवाले सेमल के पके हुए फलों के तुल्य कौओं के थोड़े उड़ने से भी नष्ट होनेवाले और
तरंगों की सुन्दर पंक्तियों के तुल्य क्षणभंगुर हैं