Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अहमर्थोऽपरिज्ञातः परमार्थाम्बरे मलम् ।
परिज्ञातोऽहमर्थस्तु परमात्माम्बरं भवेत् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए निमेष ही प्रत्यगात्मा का अविद्यारूपी मल है और उन्मेष निर्मलतारूपी मोक्ष है, इस आशय
से कहते है।
अपरिज्ञात अहंकार चिदाकाश में अविद्यारूपी मल है । परिज्ञात अहमर्थ तो चिदाकाश हो
जाता है