Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
स्वाभावतोऽस्याश्चिदृष्टेर्ये उन्मेषनिमेषणे ।
जगद्रूपानुभूतेस्तावेतावस्तमयोदयौ ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस
निर्विकल्पक चिद्वृत्ति का यानी चरम साक्षात्कार का जो उन्मेष है, वही जगत के अनुभव का अस्तमय
है ओर जो इस चरम साक्षात्कार का जो निमेष अनादि भाव हे, वही जगत अनुभव का उदय है