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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

अहंभावः परिज्ञातो नाहंभावो भवत्यलम् । एकतामम्बुनेवाम्बु याति चिन्नभसात्मना ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शंका करे कि अहमर्थ अहंकार है, वह परिज्ञात होकर भी कैसे चिदाकाश होगा ? तो इस पर कहते है। जब तक अहंकार का यथार्थरूप परिज्ञान नहीं होता, तभी तक वह अहंकार हे । यथार्थभावरूप से उसके परिज्ञात होने पर तो वह निश्चय अहंकार नहीं रहता । जैसे जल के साथ जल एकता को प्राप्त हो जाता है वैसे ही वह चिदाकाशरूपी आत्मा के साथ एकता को प्राप्त हो जाता हे