Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
भ्रमयत्यपरिज्ञानान्मृगतृष्णाम्बुधीरिव ।
महतोऽपि पदादेवं नानाज्ञानवशादधः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इससे मोहित हुए मूढ लोग दाम, व्याल ओ कटकी नाई अज्ञानवश
अन्यान्य पदों की अपेक्षा उन्नत अपरिपक्व अज्ञानदशारूपी पद से नीचे गिरते हैं