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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

एष ते कथितः सर्वो दामव्यालकथाक्रमः । मायैवमेव संसारशून्यैवात्यन्तभासुरा ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, मैंने आपसे इस प्रकार यह दाम, व्याल ओर कट की कथा का क्रम सम्पूर्ण कहा । इस प्रकार संसार से शून्य होती हुई भी संसाररूप से अत्यन्त दैदीप्यमान यह माया ही मृगतृष्णा में जलबुद्धि की तरह ज्ञानवश पुरुषों को चक्कर में डालती है