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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

यथा तैमिरिकाक्षस्य सहजा एव दृष्टयः । केशोण्ड्रकादिवद्भान्ति तथेमास्तत्र दृष्टयः ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे तिमिर रोग से पीड़ित आँखवाले पुरुष की स्वाभाविक ही दृष्टियाँ केशों के वर्तुलाकार गोलों की तरह मालूम होती हैं वैसे ही उसमें ये सृष्टियाँ शोभित होती है