Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verses 35–36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verses 35–36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
स आत्मानं यथा वेत्ति तथानुभवति क्षणात् ।
चिदाकाशस्ततोऽसत्यमपि सत्यं तदीक्षणात् ॥ ३५ ॥
न सत्यमस्ति नासत्यमिति तस्माज्जगत्त्रये ।
यद्यथा वेत्ति चिद्रूपं तत्तथोदेत्यसंशयम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
वह सत्यात्मा अपने
आत्मा को जिस-जिस प्रकार से जानता है ठीक उसी प्रकार से एक क्षण में अनुभव करता हे । इसलिए
सत्यात्मा के दृष्टिबल से असत्य वस्तु भी एक क्षण भर में सत्य सी हो जाती है