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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

सर्वं शान्तं च निःशून्यं न किंचिदिव संस्थितम् । तत्र व्योम्नि विभान्तीमा निजा भासोऽङ्ग सृष्टयः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

सारा जगत उपरत हो गया। शंका : क्या ऐसा उपरत हुआ कि शून्य ही शेष रह गया ? समाधान : नहीं शून्यरहित उपरत हुआ। शंका : तव उपरत कैसे हुआ ? समाधान : सर्वशून्य की तरह (न कि शून्य ही) सन्मात्र पूर्णभाव से स्थित है। हे श्रीरामचन्द्रजी, उस चिदाकाश में ये अपनी अन्यथा रूप से प्रथारूपी सृष्टियाँ शोभित होती हैं