Guru's AddaGuru's Adda

Sthiti Prakarana (Existence) · Sarga 30

17 verse-groups

  1. Verse 1जैसे वर्षाऋतु में जल में (४५) गंगाजी हजार मुँहों से समुद्र में प्रवेश करती हैं, इसलिए एक…
  2. Verse 2शम्बरासुर की सारी सेना नष्ट हो गयी थी, अतएव जल रही प्रलयकाल की अग्नि की तरह कुपित हुआ वह…
  3. Verse 3तदनन्तर दाम, व्याल और कट शम्बर के भय से अपने देश को छोडकर सातवें पाताल में चले गये
  4. Verse 4वहाँ पर भी क्या उन्हे शम्बर का भय नहीं था ? इस शंका को दूर करने के लिए कहते हैँ । जहाँ पर…
  5. Verse 5तदनन्तर भयरहित यमराज के सेवकों ने शरण मेँ आये हुए उन तीनों को अभय देकर मूर्तिमती चिन्ताओं…
  6. Verse 6अनन्त कुवासनाओं को प्राप्त हुए उन दाम आदि ने वहाँ पर दस हजार वर्ष पर्यन्त शेष आयु यमराज क…
  7. Verse 7उन कुवासनाओं को ही विस्तार से दिखलाते हैँ । यह मेरी स्त्री हे, यह मेरी कन्या है और यह मेर…
  8. Verse 8तदुपरान्त किसी समय यमराज अपनी इच्छा से महानरकों के कार्य का विचार करने के लिए उस प्रदेश म…
  9. Verse 9छत्र, चामर आदि चिह्नों को न देखने के कारण वे यमराज को नहीं पहचान सके, अतएव साधारण सेवक के…
  10. Verse 10तदुपरान्त यमराज ने अपने एकमात्र भ्रकुटि चढ़ाने से ही उन्हें जलती हुई रोरवादि भीषण नरक भूम…
  11. Verse 11जैसे वनाग्नि द्वारा छोटे-छोटे वृक्ष जलाये जाते हैं, वैसे ही वहाँ पर करुण क्रन्दन करनेवाले…
  12. Verse 12तदनन्तर वध और बन्धनकर्म करनेवाले यम किंकरों के साथ सहवास होने के कारण वे उसी अपनी क्रूर व…
  13. Verses 13–14किरात जन्म का त्याग करके गर्तो में कौए हुए, कौओं के जन्म के बाद उन्हें गीध का जन्म मिला,…
  14. Verse 15हे श्रीरामचन्द्रजी, अन्य विविध योनिपरम्पराओं का भोग कर अब वे काश्मीर देश के जंगल की तलैया…
  15. Verse 16के तुल्य गन्दा जल पीनेवाले वे न तो मरते हैं और न जीते ही हैं
  16. Verse 17जैसे समुद्र में तरंगें हो होकर नष्ट हो जाती हैं वैसे ही विचित्र योनियों में भ्रमण का अनुभ…
  17. Verse 18हे श्रीरामचन्द्रजी, संसाररूपी जलधि में पड़े हुए वे वासनारूपी तंतुओं से प्रेरित होकर देहरू…