Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

भवजलधिगतास्ते वासनातन्तुनुन्नास्तृणमिव चिरमूढा देहरूपैस्तरङ्गैः । उपशममुपयाता राम नाद्याप्यनन्तं परिकलय महत्त्वं दारुणं वासनायाः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, संसाररूपी जलधि में पड़े हुए वे वासनारूपी तंतुओं से प्रेरित होकर देहरूप तरंगों से तृण की तरह चिरकाल तक विविध प्रदेशों में पहुँचाये गये | यहाँ भी वे अपरिच्छेद्य फलरूप शान्ति को प्राप्त नहीं हुए हैं। वासना की भीषण महाअनर्थरूपता को इसी दृष्टान्त से आप सर्वत्र देखिये