Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
तत्र ते करुणाक्रन्दाः ससुहृद्दारबन्धवः ।
प्रदग्धाः पर्णविटपा वृक्षा इव वनानिलैः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वनाग्नि द्वारा छोटे-छोटे वृक्ष जलाये जाते हैं, वैसे ही
वहाँ पर करुण क्रन्दन करनेवाले वे अपने इष्ट मित्र, स्त्री, बन्धु-बान्धवों सहित रौरवादि नरकों की
अग्निज्वालाओं से जलाये गये