Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यथाणवो वहन्त्यर्कदीप्तिष्वप्सु रजःसु च ।
तथा वहन्ति चिद्व्योम्नि त्रैलोक्यपरमाणवः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सूर्य की दीप्ति में, जल में तथा धूलिपुंज में परमाणु भ्रमण करते हैं वैसे ही चिदाकाश में
त्रैलोक्यरूपी परमाणु भ्रमण करते हैं