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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

सूर्याद्यंशुषु संख्यातुं शक्यन्ते लघवोऽणवः । उत्पद्यन्ते चिदादित्ये त्रैलोक्यपरमाणवः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

यदि सूर्य आदि की किरणों में छोटे-छोटे परमाणुओं की गणना हो सके, तो चिद्रूप आदित्य में जो त्रैलोक्यपरमाणु उत्पन्न होते हैं, उनकी भी गणना हो सकेगी | अर्थात्‌ वे सूर्यकिरणों मे दिखाई देनेवाले परमाणुओं की तरह असंख्य हैं