Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
नाभिन्ना नापि संख्येया यथाद्रौ परमाणुकाः ।
तथा ब्रह्म बृहन्मेरौ त्रैलोक्यपरमाणवः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पर्वत में परमाणु पर्वत से
अभिन्न तथा असंख्य हे वैसे ही ब्रह्मरूपी महामेरुपर्वत मे त्रैलोक्यरूपी परमाणु न तो उससे भिन्न हैं और
न गिनने योग्य है यानी असंख्य तथा ब्रह्म से अभिन्न है