Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अद्रीन्द्रपक्षपरिमाणगमाक्षमोक्तदुर्वारहस्तिबलदारुणदेहकैर्द्राक् ।
आसीत्पतद्भटशरीरगिरीन्द्रवातविभ्रष्टदेवपुरपूर्णजलार्णवौघम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरु पर्वत के नीचे के पर्वतां के सदृश परिमाणवाले अतएव मनुष्यादि के
संचार के निरोधक होने से गमनागमन के अयोग्य पूर्वोक्त दुर्दान्त हस्ति सेनाओं के शवों से दिशाओं के
तट भर गये थे और गिर रहे योद्धाओं के शरीररूपी पर्वत और वायु से ठहे हुए देवनगरं से सब दिकृतटों
के सागरो के समूह पूर्ण हो गये थे