Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
घनघुंघुमपूरितान्तरिक्षा क्षतजक्षालितभूधरा धरा च ।
रुधिरह्रदवृत्तिवर्तिनी वा भुवनाभोगगुहा तदाकुलाभूत् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय ब्रह्माण्ड की उदरगुहा निबिड घुंघुम ध्वनि से
परिपूर्ण आकाशवाली, खून से धोये हुए पर्वत, पृथिवी, पाताल आदि से युक्त, खून का तालाब ही
जिनका आहार है, ऐसे पिशाचादि की तरह वृत्तिवाली होकर आकुल हो गई