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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

मायानदीजलधियोधघनाग्निदाहैर्वृक्षैः सुरासुरशवैरचलैः शिलोच्चैः । भ्रान्तेः शरासिशितशक्तिगदास्त्रशस्त्रैर्वातावकीर्णवनपर्णवदन्तरन्तः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

वायु से व्याप्त वन के पत्ते की नाई भीतर ही भीतर घूम रहे माया निर्मित नदी, समुद्र, योद्धा, निबिड अग्निदाहो से, वृक्षो से, देवता ओर असुरो के शवों से, पर्वतो से, चट्टानों से तथा बाण, तलवार, चोखी-चोखी शक्तियों, गदाओं ओर शस्त्रास्त्रो से दिशाओं के तट भर गये