Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
भ्रान्तैर्भृशं भरितदिक्तटमद्रिकूटैरात्मप्रमाणघनहेतिहतै रणद्भिः
कूजद्भिरार्तिभिरिवोग्रगुहोच्चवातैः क्रन्दद्भिरापतितसिंहरवैरदभ्रैः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने सदुश विशाल ओर निबिड आयुधो से आहत अतएव खूब घूम रहे, घूमने में शब्द कर रहे, विशाल
गुहाओं के तेज वायु रूपी पीडा से कराह रहे-से, दीर्घ हो रहे प्राप्त सिंह के शब्दों से रो रहे-से स्थित
हुए पर्वतो के शिखरों से दिशाओं के तट भर गये