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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

अलमायुधभारेण संगरभ्रमणेन च । वासनाया विपर्यासं युक्त्या यत्नाद्रिपोः कुरु ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

आयुधों के समूह की कोई आवश्यकता नहीं है एवं युद्ध में घूमने की भी कोई जरूरत नहीं है, आप केवल दाम, व्याल और कट की वासना के (शम्बर के संकल्प से उत्पन्न हुई निरभिमान वासना के) विपरीतता यानी अभिमान की वृद्धि युक्तिपूर्वक प्रयत्न से कीजिये