Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
अन्तरा क्षुभिते धैर्ये रिपोरमरनायक ।
न शस्त्राणि न चास्त्राणि न शास्त्राणि जयन्ति च ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे देवराज, शत्रु के हृदय
में अक्षुभित धैर्य के रहने पर न शस्त्र जीत सकते हैं, न अस्त्र जीत सकते हैं और न शुक्राचार्य आदि द्वारा
प्रणीतनीति शास्त्र ही जीत सकते हैं