Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verses 15–16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verses 15–16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 15,16

संस्कृत श्लोक

युद्धाभ्यासवशादेषां मुकुराणामिवाशये । अहंकारचमत्कारः प्रतिबिम्बमुपैष्यति ॥ १५ ॥ गृहीतवासनास्त्वेते दामव्यालकटाः सुराः । सुजेया वो भविष्यन्ति लग्नजालाः खगा इव ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

युद्धाभ्यास के कारण इनके हृदय में अहंकार का चमत्कार ऐसे प्राप्त होगा, जैसे दर्पणों के अन्दर प्रतिबिम्ब प्राप्त होता है। हे देवताओं, जैसे जाल में फँसे हुए पक्षी सरलता से पकड़े जा सकते हैं वैसे ही वासना युक्त हुए ये दाम, व्याल और कट नामक असुर आप लोगों के सुजेय हो जायेंगे