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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verses 13–14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verses 13–14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 13,14

संस्कृत श्लोक

श्रीब्रह्मोवाच । शतवर्षसहस्रान्ते शम्बरेण हरेः करात् । मर्तव्यं समरेशस्य तत्कालं संप्रतीक्षताम् ॥ १३ ॥ दामव्यालकटानेतानद्य त्वमरसत्तमाः । योधयन्तः पलायध्वं मायायुद्धेन दानवान् ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीब्रह्माजी ने कहा : हे देव श्रेष्ठों, एक लाख वर्षों के बाद संग्राम के अधिपति श्रीहरि के हाथ से शम्बर का मरना बदा (निश्चित) है। आप लोग उस काल की प्रतीक्षा कीजिये आप लोग इस समय तो इन दाम, व्याल ओर कट नामक दानवों को माया युद्ध से लड़ाते हुए भागिये