Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अद्य त्ववासना ह्येते सुखदुःखविवर्जिताः ।
धैर्येणारीन्विनिघ्नन्तो देवा दुर्जयतां गताः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
सुख-दुःख से रहित ये
आज तो शम्बर के संकल्पानुसार वासनारहित हैं, इसलिए हे देवताओं, धैर्यपूर्वक शत्रुओं के ऊपर
प्रहार कर रहे ये दुर्जय हो गये हैं