Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
भोगेषु प्रसरो यस्या मनोवृत्तेश्च दीयते ।
साप्यादावेव हन्तव्या विषस्येवाङ्कुरोद्गतिः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
जो भोगतृष्णा मनोवृत्ति का भोगों में प्रसार करती है, जैसे विष वृक्ष के
अंकुरोद्रम का ही विनाश कर दिया जाता हे, वैसे ही उसका भी पहले ही नाशकर देना चाहिये