Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
त्यजत्स्वात्मसुखं सौम्यं मनो विषयविद्रुतम् ।
अङ्कुशेनेव नागेन्द्रं विचारेण वशं नयेत् ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे जिसका ज्ञान परिपक्व नहीं हुआ, ऐसा पुरूष विषयों में दौड़ रहे मन का निग्रह
कैसे करें ? तो इस पर कहते है।
सौम्य आत्मसुख का त्याग कर विषयों की ओर दौड हुए मन को, गजराज को अंकुश की तरह,
विचार से वश में लाये