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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 42

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

यस्योदयास्तमयसंकलनाकलासु चित्रासु चारुविभवासु जगद्गतासु । वृत्तिः सदैव सकलैकमतेरनन्ता तस्मै नमः परमबोधवते शिवाय ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण जगत में एक ब्रह्म ही है, इस बुद्धि से युक्त जिस पुरुषकी ब्रह्माकार दृष्टि संसार में स्थित विचित्र और सुन्दर विभवो से युक्त सृष्टि, प्रलय और स्थिति में सदा ही अपरिच्छिन्न हे, उस परम बोध से युक्त जीवन्मुक्त शरीरवाले साक्षात शिव को नमस्कार है