Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verses 33–34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verses 33–34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

यन्नाम किंचित्त्रैलोक्यं स एवावयवो मम । तरङ्गोऽब्धाविवेत्यन्तर्यः पश्यति स पश्यति ॥ ३३ ॥ शोच्या पाल्या मयैवेयं स्वसेयं मे कनीयसी । त्रिलोकी पेलवेत्युच्चैर्यः पश्यति स पश्यति ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

जो भी कुछ यह त्रैलोक्य है, वह समुद्र में तरंग की भाँति मेरे ही अवयव है, इस तरह जो अपने अन्दर देखता है, वही पूर्वोक्तपूर्ण आत्मा को देखता है