Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
जनितोत्तमसौन्दर्या दूरादस्तमयोन्नता ।
समतोदेति सर्वत्र शान्ते वात इवार्णवे ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वायु के शान्त होने पर समुद्र में समता (निश्चलता) उदित
होती है, वैसे ही मन के शान्त होने पर सब जगह सर्वोत्तम सुख पैदा करनेवाली, अज्ञानरूपी मल से
विमुक्त, उन्नत समदृष्टिता उदित होती है