Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
शान्ते संदेहदौरात्म्ये गतकौतुकविभ्रमम् ।
परिपूर्णान्तरं चेतः पूर्णेन्दुरिव राजते ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान से विनिर्मुक्त मन की कैसी स्थिति होती है, उसे कहते है ।
संशयरूपी दुष्टता के शान्त होने पर कौतुकभ्रम से निर्मुक्त, परिपूर्ण अन्तभागवाला मन पूर्ण चन्द्र
के तुल्य प्रकाशमान हो जाता है