Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
पुरुषश्चेच्छरीरं स्यात्कथं शुक्रो महामतिः ।
अगमद्विविधाकारं जन्मान्तरशतभ्रमम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि देह ही पुरुष हो, मन पुरुष न हो, तो इस पर कहते हैं।
यदि शरीर पुरुष होता, तो महामति शुक्राचार्य विविध आकारवाले अन्यान्य सैकड़ों जन्म रूप
भ्रमों को कैसे प्राप्त होते ?